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सारण की सड़कों पर क्या तय हुआ बिहार का भविष्य?

“तीनों नेताओं की एकजुटता: चुनावी गणित या जनआंदोलन?”

बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव के साथ अखिलेश यादव की सहभागिता

बिहार की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच लोकतंत्र की रक्षा और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर शुरू की गई ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस ऐतिहासिक अभियान के 14वें दिन शनिवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे सारण में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के साथ यात्रा का हिस्सा बने। तीनों नेता एक खुली जीप पर सवार होकर जनसमर्थन प्राप्त करते हुए विभिन्न स्थानों पर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए।

अखिलेश यादव की इस यात्रा में सहभागिता महागठबंधन की एकता को और मजबूती देती दिखी। इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेता एम.के. स्टालिन, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता इस यात्रा में हिस्सा ले चुके हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट के माध्यम से अखिलेश यादव के इस कदम का स्वागत करते हुए लिखा, “लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस ऐतिहासिक आंदोलन में अखिलेश यादव जी का स्वागत है। वे भाजपा द्वारा लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ एक अडिग सहयोगी रहे हैं।”

यह यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी और इसका समापन 1 सितंबर को पटना में एक ‘विशाल पैदल मार्च’ के साथ किया जाएगा। शनिवार को वाहन यात्रा का अंतिम दिन था, जिसके बाद सोमवार को पटना में अंतिम चरण का पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित होगा। यात्रा का उद्देश्य मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतंत्र को बचाए रखने की अपील करना और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करना बताया गया है।

इस यात्रा को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। महागठबंधन के नेता इसे जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का मंच मानते हैं। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अब अखिलेश यादव की एकजुटता, विपक्षी गठबंधन को एक नई मजबूती देती नजर आ रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा के माध्यम से विपक्ष बिहार में एक साझा एजेंडा तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें गरीबों, पिछड़ों और युवाओं के मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही यह यात्रा जनता को यह संदेश देने की कोशिश है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संविधान, लोकतंत्र और जनहित की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

कुल मिलाकर, ‘वोटर अधिकार यात्रा’ बिहार की राजनीति में एक नई ऊर्जा और दिशा देने वाला आंदोलन बन गया है, जिसमें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख विपक्षी नेताओं की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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