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स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों पर होगी नजर! 1 जुलाई से यूपी में शुरू होगा विशेष अभियान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में शिक्षा के स्तर को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में 1 जुलाई से ‘स्कूल चलो अभियान’ का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल जाने की आयु का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और उसका नामांकन नजदीकी विद्यालय में कराया जाए।

राज्य सरकार ने इस संबंध में सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित उत्तर प्रदेश की नींव रख सकती है, इसलिए हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई विशेष जिम्मेदारी

अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें।

इसके अलावा कक्षा 5 से 6, कक्षा 8 से 9 और कक्षा 10 से 11 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश की जिम्मेदारी भी संबंधित विद्यालय प्रमुखों को दी गई है। सरकार चाहती है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई बीच में न छूटे और वह अगली कक्षा में समय पर प्रवेश ले सके।

लगातार अनुपस्थित विद्यार्थियों पर रहेगी नजर

शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने के लिए भी नई रणनीति तैयार की है। निर्देश दिए गए हैं कि जो छात्र लगातार विद्यालय नहीं आ रहे हैं, उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क किया जाए।

विद्यालय प्रशासन घर-घर जाकर या फोन के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करेगा। इसका उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजना है।

ऑनलाइन उपस्थिति और शैक्षिक कैलेंडर पर विशेष जोर

सरकार ने सभी विद्यालयों को शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार नियमित पठन-पाठन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना भी अनिवार्य किया गया है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों की वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

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लंबित भुगतान 30 जून तक निपटाने के निर्देश

समग्र शिक्षा अभियान और पीएम श्री योजना के तहत लंबित भुगतान को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 30 जून तक लंबित भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

इसके साथ ही विकास कार्यों और निर्माण परियोजनाओं को भी तय समयसीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया गया है।

प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार ने विद्यालयों में प्रयोगशालाओं के उपकरणों का सत्यापन कर उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए हैं। विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी लैब को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।

इसके अलावा प्रोजेक्ट अलंकार, नए मिनी स्टेडियम और 44 इंडोर मिनी स्टेडियमों से जुड़े कार्यों की प्रगति तेज करने को भी कहा गया है। इससे छात्रों को खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

ड्रीम लैब और प्रोजेक्ट प्रवीण की होगी निगरानी

शिक्षा विभाग ने ड्रीम लैब परियोजना, प्रोजेक्ट प्रवीण तथा बीएड विद्यार्थियों की इंटर्नशिप कार्यक्रमों की नियमित निगरानी के निर्देश भी जारी किए हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल आधारित प्रशिक्षण भी मिले, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

योगी सरकार का ‘स्कूल चलो अभियान’ उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 1 जुलाई से शुरू होने वाला दूसरा चरण न केवल नए बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करेगा, बल्कि ड्रॉपआउट रोकने, उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाएगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहेगा।

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