“कांग्रेस की चाल, तेजस्वी की ताल: सीट बंटवारे में कौन करेगा कमाल?”

बिहार चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर इंडिया गठबंधन का मंथन तेज, जातीय समीकरण साधने की रणनीति
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर इंडिया गठबंधन ने अपनी रणनीतिक तैयारियों को गति दे दी है। वोटर अधिकार यात्रा के समापन के बाद अब गठबंधन का पूरा ध्यान सीट बंटवारे पर केंद्रित हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को पटना में गठबंधन के घटक दलों—आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी—के प्रदेश स्तरीय नेताओं की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर प्रारंभिक सहमति बनने की उम्मीद है।
दिल्ली में हो सकती है शीर्ष बैठक
पटना बैठक के बाद अगले हफ्ते दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, तेजस्वी यादव और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों की मानें तो इसी बैठक के बाद सीट बंटवारे का औपचारिक एलान किया जा सकता है। कांग्रेस की कोशिश है कि सितंबर के दूसरे हफ्ते तक इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाए ताकि उम्मीदवार चयन और प्रचार की तैयारियां समय पर शुरू की जा सकें।
पिछली बार का बंटवारा और इस बार की चुनौतियां
2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने 144 सीटों, कांग्रेस ने 70 सीटों, और वामदलों ने कुल 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वाम दलों में सीपीआई (एमएल) ने 19, जबकि सीपीएम और सीपीआई ने मिलकर 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इस बार गठबंधन में वीआईपी पार्टी भी शामिल हो गई है और सीपीआई (एम) अपनी सीटों की संख्या दोगुनी करने की मांग कर रही है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए संभावना है कि कांग्रेस और आरजेडी को पिछली बार की तुलना में 10% सीटें कम मिल सकती हैं। हालांकि कांग्रेस कम सीटों पर लड़ने को तैयार दिख रही है, लेकिन वह मजबूत और जीतने योग्य सीटों की मांग पर अड़ी हुई है। वोटर अधिकार यात्रा के बाद कांग्रेस में नया जोश देखा जा रहा है, जिससे वह आरजेडी पर भी दबाव बनाने की स्थिति में है।
संभावित फॉर्मूला और जातीय समीकरण
सूत्रों के मुताबिक, वाम दलों और वीआईपी के लिए लगभग 50 सीटें छोड़ी जा सकती हैं, जबकि शेष 193 सीटें कांग्रेस और आरजेडी के बीच बांटी जाएंगी। हालांकि, सीटों की संख्या के साथ-साथ सभी दलों के बीच जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव, और संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चा होगी।
इंडिया गठबंधन की रणनीति यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण के साथ-साथ दलित, मल्लाह और अति पिछड़ी जातियों को जोड़ने की है। इस सामाजिक समीकरण को मजबूत करके गठबंधन एनडीए को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है।
निष्कर्ष
बिहार में इंडिया गठबंधन की सीट बंटवारे की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है। पटना और दिल्ली की आगामी बैठकों में लिए गए फैसले न केवल सीटों का गणित तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि गठबंधन जनाधार और रणनीति के किस रास्ते पर आगे बढ़ेगा। जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती को देखते हुए ही सीट बंटवारा तय होगा। चुनावी बिगुल बजने से पहले यह कवायद गठबंधन के लिए बहुत अहम साबित हो सकती है।