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‘वे मुझे मारना चाहते हैं…’ सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला, हेलमेट पहनकर बोले- यहां से मेरी लाश ही जाएगी!

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उस समय गरमा गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर अज्ञात लोगों ने हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनके ऊपर पत्थर, जूते और अंडे फेंके गए, जबकि कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की और बदसलूकी भी की।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अभिषेक बनर्जी को अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना पड़ा। घटना के दौरान उनकी शर्ट भी फट गई। इसके बावजूद उन्होंने मौके को छोड़ने से इनकार कर दिया और कहा कि वे पीड़ित परिवार को अकेला छोड़कर नहीं जाएंगे।

‘वे मुझे मारना चाहते हैं, लेकिन मैं नहीं हटूंगा’

घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा कि उनके विरोधी उनकी जान लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा,

“वे मुझे मारना चाहते हैं। उन्हें मुझे मारने दो। मेरी लाश यहीं से बरामद होने दो, लेकिन मैं यहां से नहीं जाऊंगा। जब तक संजू के माता-पिता सुरक्षित नहीं हो जाते और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, मैं इसी जगह रहूंगा।”

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। समर्थकों ने इसे साहसिक रुख बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक नाटक करार दिया।

आखिर क्या हुआ सोनारपुर में?

जानकारी के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी शनिवार को चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। जैसे ही उनका काफिला इलाके में पहुंचा, कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और “चोर-चोर” के नारे लगाए। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर जूते, अंडे और अन्य वस्तुएं फेंकीं। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें घेर लिया और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

हालात बिगड़ते देख अभिषेक को पुलिस सुरक्षा के बीच सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। हालांकि उन्होंने वहां से जाने से इनकार करते हुए पीड़ित परिवार के घर में ही रुकने का फैसला किया।

पुलिस पर भी उठाए सवाल

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि जब उनके साथ यह घटना हुई, तब वहां कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम रही।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क करें और अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाने की मांग करें। इसके बाद इलाके में पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।

सोनारपुर पुलिस स्टेशन और बारुईपुर पुलिस जिले से भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजा गया। सुरक्षा एजेंसियों ने उस घर को चारों तरफ से घेर लिया, जहां अभिषेक मौजूद थे।

बीजेपी पर लगाया आरोप

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विरोध और हमला राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इसके पीछे बीजेपी समर्थकों का हाथ हो सकता है।

हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि विपक्ष डर और हिंसा के जरिए उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है।

बीजेपी ने किया पलटवार

दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इस घटना से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करती। समिक ने तृणमूल कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना समेत कई इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक राजनीतिक विरोधियों को डराने का काम किया है।

उन्होंने कहा,

“अगर बीजेपी चाहती, तो टीएमसी के नेता सड़कों पर निकल भी नहीं पाते। लेकिन हमने लोकतांत्रिक मर्यादा और संयम बनाए रखा है।”

बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव

इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव बाद हिंसा, राजनीतिक टकराव और नेताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए ऐसी घटनाएं राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकती हैं।

सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित बदसलूकी और हमले की घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। जहां टीएमसी इसे विपक्ष की साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी सभी आरोपों से इनकार कर रही है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस घटना का राजनीतिक असर और अधिक देखने को मिल सकता है।

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