मुंबई: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच वर्षों से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर दिसंबर 2026 तक हस्ताक्षर होने की संभावना है, जबकि इसे अगले वर्ष फरवरी-मार्च तक लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञ इस समझौते को वैश्विक व्यापार जगत में “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह रहे हैं, क्योंकि यह दुनिया की दो बड़ी आर्थिक शक्तियों को एक नए व्यापारिक ढांचे में जोड़ने जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
भारत लंबे समय से अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। यूरोपीय संघ भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते के तहत भारतीय निर्यात का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) पहुंच प्राप्त करेगा। इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद यूरोप में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का लाभ विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों को मिलेगा:
- टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग
- ऑटो कंपोनेंट सेक्टर
- फार्मास्यूटिकल्स
- इंजीनियरिंग उत्पाद
- कृषि एवं खाद्य उत्पाद
- आईटी एवं सेवा क्षेत्र
इन उद्योगों को यूरोप के 27 देशों के विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

यूरोप से क्या होगा सस्ता?
जहां भारतीय निर्यातकों को लाभ मिलेगा, वहीं यूरोपीय उत्पादों के लिए भी भारतीय बाजार अधिक खुला होगा।
समझौते के तहत यूरोप से आयात होने वाली कई वस्तुओं पर शुल्क में कटौती की जा सकती है। विशेष रूप से:
- लक्जरी कारें
- प्रीमियम वाइन
- हाई-एंड मशीनरी
- कुछ तकनीकी उत्पाद
इन उत्पादों की कीमतों में भविष्य में कमी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी साझेदारी
भारत और यूरोपीय संघ की संयुक्त आर्थिक ताकत बेहद प्रभावशाली है।
दोनों मिलकर:
- वैश्विक GDP का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
- विश्व व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देते हैं।
यही वजह है कि इस समझौते को आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
अमेरिका और कनाडा के साथ भी बढ़ रही बातचीत
पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में यह भी संकेत दिया कि भारत केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि अमेरिका और कनाडा के साथ भी व्यापारिक समझौतों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर जल्द ही भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और संभावित समझौतों पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी।
इसके अलावा, हाल ही में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा ने भी भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की इच्छा जताई है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में भी मदद करेगा।
भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं को इससे नई गति मिल सकती है। विदेशी निवेश बढ़ने, रोजगार के नए अवसर पैदा होने और उत्पादन क्षमता में वृद्धि की भी उम्मीद है।
निवेशकों और उद्योग जगत की नजर
घोषणा के बाद उद्योग जगत और निवेशकों ने इस समझौते का स्वागत किया है। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समझौता तय समय पर लागू हो जाता है तो भारत का निर्यात अगले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, भारतीय कंपनियों को यूरोप में व्यापार विस्तार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है। दिसंबर में हस्ताक्षर और अगले वर्ष इसके लागू होने की संभावना ने उद्योग जगत में नई उम्मीदें जगा दी हैं। यदि समझौता तय समय पर लागू होता है, तो भारत को वैश्विक व्यापार में एक नई पहचान और मजबूती मिलने की उम्मीद है।