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‘भगवंत मान नहीं हटे तो होगा धर्म युद्ध!’ अकाली दल का बड़ा ऐलान, CM के खिलाफ 5 सदस्यीय कमेटी गठित

पंजाब: की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग तेज कर दी है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया गया तो अकाली दल “धर्म युद्ध मोर्चा” शुरू करेगा।

इस घोषणा के साथ ही पंजाब की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अकाली दल ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए व्यापक जनसमर्थन जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है।

5 सदस्यीय कमेटी का गठन

सुखबीर बादल ने घोषणा की कि पार्टी ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए 5 सदस्यीय विशेष कमेटी गठित की है। यह कमेटी संत समाज, धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से संपर्क कर समर्थन जुटाएगी।

अकाली दल का दावा है कि यह केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं और संस्थाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

अकाल तख्त के आदेशों की अवहेलनाa का आरोप

सुखबीर बादल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों और आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके आदेशों की अनदेखी को सिख भावनाओं का अपमान माना जा रहा है।

बादल ने कहा कि इस मामले को लेकर कई शिकायतें अकाल तख्त के समक्ष दर्ज कराई गई थीं, जिसके बाद संबंधित कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि सरकार और मुख्यमंत्री ने इस विषय पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

विवादित वीडियो को लेकर भी उठाए सवाल

अकाली दल प्रमुख ने अपने बयान में एक विवादित वीडियो का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति द्वारा वीडियो सार्वजनिक किया गया था।

सुखबीर बादल ने सवाल उठाया कि यदि वीडियो पूरी तरह फर्जी था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया था, तो फिर मामले में इतनी तेजी से एफआईआर दर्ज कराने और अदालत जाने की जरूरत क्यों पड़ी।

उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी तक जनता को नहीं मिला है।

19 जुलाई तक का अल्टीमेटम

अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को हटाने के लिए 19 जुलाई तक का समय दिया है। पार्टी का कहना है कि यदि इस अवधि के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

सुखबीर बादल ने कहा कि धर्म युद्ध मोर्चा केवल अकाली दल का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसमें विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठन भी शामिल हो सकते हैं।

विधानसभा के बहिष्कार का ऐलान

अकाली दल ने आंदोलन को और प्रभावी बनाने के लिए विधानसभा की कार्यवाही के बहिष्कार का भी फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि जब तक भगवंत मान मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे, तब तक अकाली दल के विधायक विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे।

इस फैसले को पंजाब विधानसभा की राजनीति में एक बड़े विरोधी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सीबीआई जांच की मांग

सुखबीर बादल ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जांच रिपोर्टों और प्रक्रियाओं पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

अकाली दल ने संकेत दिया है कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात कर अपनी मांगों को औपचारिक रूप से रखेगा।

पंजाब की राजनीति पर क्या होगा असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। अकाली दल इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी और राज्य सरकार अपने पक्ष को मजबूती से रख रही है।

यदि आंदोलन आगे बढ़ता है तो इसका असर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों और विधानसभा सत्रों पर भी दिखाई दे सकता है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ अकाली दल द्वारा शुरू किया गया यह अभियान पंजाब की राजनीति में नए टकराव का संकेत दे रहा है। 19 जुलाई तक दिए गए अल्टीमेटम, 5 सदस्यीय कमेटी के गठन और धर्म युद्ध मोर्चा शुरू करने की चेतावनी ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष इस विवाद को किस दिशा में लेकर जाते हैं।

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