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बिहार चुनाव 2025: सत्ता के 7 द्वार का खेल, किस ओर झुकेगा पलड़ा?

बिहार चुनाव 2025: सत्ता के सात द्वार, कौन करेगा अंतिम कब्ज़ा?

मिथिलांचल से सीमांचल: बिहार में बीजेपी कहां मजबूत और कहां फंसा है खेल, सत्ता के 7 द्वार का समीकरण

बिहार की राजनीति हमेशा से क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित रही है। यहां हर चुनाव का परिणाम सिर्फ राज्यव्यापी लहर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि अलग-अलग इलाकों के स्थानीय मुद्दों, जातीय समीकरणों और नेताओं की पकड़ पर भी काफी हद तक टिका होता है। यही वजह है कि जैसे-जैसे 2025 का चुनाव नज़दीक आ रहा है, बिहार के अलग-अलग इलाकों में बीजेपी और उसके सहयोगी दल अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ रहे हैं।

मिथिलांचल की तस्वीर:
मिथिलांचल में पारंपरिक रूप से बीजेपी और जेडीयू की पकड़ रही है। यहां शहरी मध्यमवर्ग, व्यापारी समुदाय और मैथिल ब्राह्मणों का बड़ा वर्ग एनडीए को सपोर्ट करता रहा है। 2020 के चुनाव में भी बीजेपी ने इस इलाके में अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि, सीमित संख्या में सीटें होने की वजह से यहां पूरी तरह निर्णायक बढ़त बनाना आसान नहीं है। महागठबंधन की ओर से आरजेडी और कांग्रेस ने भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, खासकर यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे।

सीमांचल का समीकरण:
सीमांचल हमेशा से बिहार की राजनीति का ‘गेम चेंजर’ क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां की लगभग आधी आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल सकती है। 2020 में एआईएमआईएम ने इस इलाके में अप्रत्याशित सफलता हासिल कर सबको चौंका दिया था। बाद में उसका बड़ा हिस्सा आरजेडी में शामिल हो गया, लेकिन इससे साफ है कि सीमांचल के वोट बैंक में बड़ी हलचल की संभावना हमेशा बनी रहती है। बीजेपी के लिए यहां मजबूत होना बेहद कठिन है क्योंकि परंपरागत तौर पर उसका वोट बैंक कमजोर है। यही वजह है कि वह विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और केंद्र की योजनाओं को बड़ा मुद्दा बनाकर इस इलाके में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

उत्तर बिहार और मगध क्षेत्र:
उत्तर बिहार में बीजेपी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है। यहां जातीय आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण अक्सर बीजेपी के पक्ष में होता है। मगध में हालांकि आरजेडी और वामपंथी दलों का प्रभाव दिखता है, जिससे यहां मुकाबला हमेशा कांटे का होता है।

सत्ता के 7 द्वार का समीकरण:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की सत्ता तक पहुंचने के लिए सात बड़े इलाकों—मिथिलांचल, सीमांचल, मगध, उत्तर बिहार, भोजपुर, शाहाबाद और कोसी—में संतुलन बनाना ज़रूरी है। बीजेपी इन सातों ‘द्वारों’ में से कम से कम चार पर मज़बूत प्रदर्शन करने की रणनीति बना रही है। वहीं महागठबंधन का लक्ष्य है कि वह सीमांचल, कोसी और मगध जैसे इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत रखे और उत्तर बिहार व मिथिलांचल में सेंध लगाए।


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