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“दिल्ली में आग का तांडव! नरेला की प्लास्टिक फैक्ट्री धधकी, आसमान में छाया काला गुबार; लोगों में मची दहशत”

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक प्लास्टिक फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी फैक्ट्री से आसमान की ओर घने काले धुएं का विशाल गुबार उठने लगा, जिसे कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता था। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्री के आसपास जमा हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के कुछ ही देर बाद फैक्ट्री के अंदर से तेज लपटें निकलने लगीं। देखते ही देखते आग ने फैक्ट्री के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई, जिससे हालात और गंभीर हो गए।

आसमान में छाया काला धुआं

घटना के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने आसपास के लोगों को भयभीत कर दिया। फैक्ट्री से उठ रहा घना काला धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया। कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें दूर से ही धुएं का गुबार दिखाई दे रहा था और शुरुआत में उन्हें लगा कि किसी बड़े औद्योगिक हादसे की आशंका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक में आग लगने पर निकलने वाला धुआं सामान्य आग की तुलना में अधिक जहरीला हो सकता है। ऐसे धुएं में कई प्रकार के रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर

आग की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस हरकत में आ गई। दमकल विभाग की कई गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।

फायर ब्रिगेड के जवानों ने फैक्ट्री के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर आग को आसपास की अन्य इकाइयों तक फैलने से रोकने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार, आग पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त यूनिट्स भी तैनात की गईं।

दमकल कर्मी लगातार कई घंटों से आग बुझाने में जुटे रहे। आग की तीव्रता को देखते हुए ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

आसपास के लोगों में दहशत

घटना के बाद स्थानीय निवासियों और फैक्ट्री कर्मचारियों में दहशत फैल गई। कई लोगों ने एहतियातन अपने प्रतिष्ठान और कार्यस्थल खाली कर दिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आग की लपटें और धुआं देखकर उन्हें किसी बड़े विस्फोट की आशंका होने लगी थी। कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से घटना के वीडियो भी रिकॉर्ड किए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

प्लास्टिक फैक्ट्रियों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

विशेषज्ञ बताते हैं कि प्लास्टिक उद्योग में आग लगने का जोखिम सामान्य उद्योगों की तुलना में अधिक होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि प्लास्टिक, रबर और अन्य रासायनिक पदार्थ अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं।

एक बार आग लगने के बाद यह बहुत तेजी से फैलती है और उससे निकलने वाला धुआं वातावरण को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में फायर सेफ्टी मानकों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी माना जाता है।

कारणों की जांच शुरू

फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी जैसी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अधिकारियों ने अभी किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियां आग बुझने के बाद विस्तृत जांच करेंगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हादसा कैसे हुआ और क्या फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।

जनहानि की कोई पुष्टि नहीं

राहत की बात यह है कि समाचार लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के बाद ही नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा।

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