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“ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट पर हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी! ज्यादा मुआवजे की मांग पर किसान पहुंचा अदालत, यथास्थिति का आदेश जारी”

आगरा: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी शहरी विकास प्रोजेक्ट्स में शामिल ग्रेटर आगरा टाउनशिप एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार विवाद भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सामने आया है। रहनकलां गांव के एक किसान द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर दायर याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया है। अदालत के इस आदेश के बाद स्थानीय किसानों और परियोजना से जुड़े हितधारकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।

हालांकि आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) का कहना है कि अदालत के आदेश का परियोजना के निर्माण कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और निर्धारित विकास कार्य जारी रहेंगे।

क्या है पूरा मामला?

ग्रेटर आगरा टाउनशिप परियोजना आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा रायपुर और रहनकलां क्षेत्र में विकसित की जा रही है। लगभग 649 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना का शिलान्यास 7 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था।

परियोजना को आगरा के भविष्य के शहरी विस्तार और आधुनिक आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना क्षेत्र की लगभग 86 प्रतिशत भूमि का मुआवजा पहले ही वितरित किया जा चुका है।

लेकिन कुछ किसानों ने मुआवजे की दरों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सड़क किनारे स्थित उनकी जमीन का मूल्य गांव के अंदर स्थित भूमि की तुलना में अधिक है, इसलिए उन्हें अधिक मुआवजा मिलना चाहिए।

किसान की याचिका पर हाई कोर्ट की सुनवाई

रहनकलां निवासी किसान कमलेश बाबू ने इसी मुद्दे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ में 27 मई को हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादी पक्ष यानी आगरा विकास प्राधिकरण को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। याचिकाकर्ता को भी एडीए के जवाब के बाद एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।

 

किसानों की मुख्य आपत्ति क्या है?

भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में अक्सर यह विवाद सामने आता है कि अलग-अलग स्थानों पर स्थित भूमि का बाजार मूल्य अलग होता है।

रहनकलां के कुछ किसानों का कहना है कि उनकी भूमि मुख्य सड़क से सटी हुई है, जिससे उसका व्यावसायिक और विकासात्मक महत्व अधिक है। ऐसे में उन्हें उसी दर से मुआवजा मिलना चाहिए जो सड़क किनारे की जमीन के लिए निर्धारित हो।

दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि मुआवजा निर्धारित नियमों और अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार तय किया गया है।

एडीए ने क्या कहा?

आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एम. अरून्मोली के अनुसार, याचिकाकर्ता की हिस्सेदारी संबंधित गाटा संख्या 166 और 169 में आंशिक रूप से है।

उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि का कुछ हिस्सा 45 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़क के दायरे में आता है। साथ ही, उसी भूमि के अन्य हिस्सेदारों में से दो व्यक्ति पहले ही अपना प्रतिकर प्राप्त कर चुके हैं।

एडीए का दावा है कि अदालत के यथास्थिति आदेश से सड़क निर्माण या परियोजना के अन्य विकास कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ग्रेटर आगरा परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?

ग्रेटर आगरा को आगरा के भविष्य के शहरी विस्तार की आधारशिला माना जा रहा है। इस परियोजना के तहत आधुनिक आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक क्षेत्र, सड़क नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आगरा के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति दे सकती है।

हालांकि भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसलिए प्रशासन और किसानों के बीच संतुलित समाधान निकालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत द्वारा मांगे गए जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

यदि अदालत मुआवजे के निर्धारण में किसी प्रकार की विसंगति पाती है, तो संबंधित किसानों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि प्राधिकरण का पक्ष मजबूत साबित होता है, तो परियोजना बिना किसी बड़े बदलाव के आगे बढ़ सकती है।

ग्रेटर आगरा टाउनशिप परियोजना को लेकर भूमि मुआवजा विवाद ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। रहनकलां के किसान की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने से मामला फिलहाल न्यायिक विचाराधीन है। हालांकि एडीए का कहना है कि परियोजना के विकास कार्यों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अब अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाले तथ्यों पर सबकी नजर रहेगी।

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