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‘गिरफ्तार करना है तो कर लो…’ ममता बनर्जी की खुली चुनौती, भाजपा पर TMC तोड़ने की साजिश का बड़ा आरोप

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के विरोध में प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद ममता बनर्जी ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार करना है तो कर लिया जाए, लेकिन वह विरोध प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेंगी।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है और उनकी पार्टी किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने तथा पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

धरने की अनुमति नहीं मिलने पर भड़कीं ममता

तृणमूल कांग्रेस ने सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में 2 जून को कोलकाता के रानी राशमोनी एवेन्यू में धरना प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई थी। हालांकि पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद फेसबुक पर जारी वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी बिना माइक, बिना मंच और बिना प्रशासनिक अनुमति के भी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगी।

उन्होंने कहा, “अगर हमें कोलकाता में प्रदर्शन नहीं करने दिया जाएगा तो हम दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे। जहां मुझे रोका जाएगा, मैं वहीं बैठ जाऊंगी। मैं गिरफ्तारी के लिए भी तैयार हूं।”

’10 हजार कार्यकर्ता पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके’

ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं को पहले ही निशाना बनाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि लगभग 10 हजार तृणमूल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।

ममता ने यह भी कहा कि यदि राज्य में विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी तो पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करेगी।

भाजपा पर लगाया पार्टी तोड़ने का आरोप

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को डराने और राजनीतिक दलों को कमजोर करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों को पैसे का लालच दिया जा रहा है, जबकि कुछ नेताओं को केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। ममता ने आरोप लगाया कि कई नेताओं और उनके परिवारों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे पार्टी छोड़ दें।

उन्होंने कहा कि डर और दबाव की राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

चुनावी धांधली के भी लगाए आरोप

ममता बनर्जी ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सीटों पर मतदान और मतगणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं।

उन्होंने दावा किया कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई और तकनीकी गड़बड़ियों का लाभ उठाया गया। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई नया दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान बंगाल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकते हैं।

सुरक्षा हटाने को लेकर भी जताई नाराजगी

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी पर हमले से पहले उनकी सुरक्षा व्यवस्था कमजोर की गई थी। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे नेताओं की सुरक्षा हटा दी गई है जिन्हें वास्तविक खतरा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

हाई कोर्ट जाने की तैयारी

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी इस पूरे मामले को कानूनी रूप से भी चुनौती देगी। उन्होंने बताया कि आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं और अदालत में अपनी बात मजबूती से रखी जाएगी।

ममता ने कहा कि यदि लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल में बाधा डाली जाएगी तो न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कानून के तहत पार्टी को न्याय मिलेगा।

बंगाल की राजनीति में बढ़ा टकराव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस प्रशासन पर राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा लगातार राज्य सरकार और टीएमसी नेतृत्व पर सवाल उठाती रही है।

ऐसे में बंगाल की राजनीति में टकराव का यह दौर आगामी चुनावी रणनीतियों और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के विरोध में प्रस्तावित धरने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। ममता बनर्जी ने भाजपा और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी तक की चुनौती दे दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर घमासान देखने को मिल सकता है।

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