गुजरात में बड़ा फेरबदल तय, मिशन 2027 का मास्टरमाइंड कौन होगा?

गुजरात बीजेपी को कल मिलेगा नया अध्यक्ष, मिशन 2027 की तैयारी तेज
गुजरात भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कल यानी 4 अक्टूबर को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है। पार्टी की राज्य इकाई द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 4 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। अगर एक से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया, तो चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी, और वोटिंग की स्थिति में परिणाम उसी दिन घोषित किया जा सकता है। हालांकि, बीजेपी की परंपरा को देखते हुए यह संभावना काफी कम है क्योंकि आमतौर पर संगठनात्मक चुनाव में एकमात्र उम्मीदवार ही नामांकन करता है। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि कल ही गुजरात बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा।
मिशन 2027 की जिम्मेदारी
गुजरात बीजेपी का नया अध्यक्ष ऐसे समय पर चुना जा रहा है जब पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2027 की तैयारी करनी है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की थी, और अब पार्टी उसी लय को बनाए रखना चाहती है। नया अध्यक्ष सिर्फ संगठन को मजबूत करने की भूमिका नहीं निभाएगा, बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव और 2027 के बड़े महासंग्राम की रणनीतिक कमान भी उसके हाथ में होगी।
किसके नाम की चर्चा?
हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी नाम की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में कई नामों की चर्चा तेज है। इनमें वर्तमान संगठन महामंत्री से लेकर कुछ वरिष्ठ विधायकों और मंत्रियों के नाम भी चल रहे हैं। पार्टी नेतृत्व आमतौर पर ऐसा चेहरा चुनता है जो संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ जनता और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हो।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर असर
गुजरात में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव केवल राज्य स्तर की बात नहीं है, इसका सीधा संबंध राष्ट्रीय राजनीति से भी है। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव फिलहाल अटका हुआ है, और इसकी मुख्य वजह यह है कि अभी तक गुजरात और उत्तर प्रदेश – दो सबसे अहम राज्यों – में प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदले गए थे।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से सांसद हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से। संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया के तहत, राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन पत्र पर इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के दस्तखत अनिवार्य हैं। लेकिन जब तक इनके राज्य में संगठन चुनाव पूरे नहीं हो जाते, ये दस्तखत संभव नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि गुजरात में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के तुरंत बाद यूपी में भी यह प्रक्रिया तेज होगी, और उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता साफ होगा।