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अब 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं! सरकार का बड़ा आदेश, कॉमर्शियल यूजर्स पर लगी सख्त रोक

देशभर: में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नया आदेश जारी करते हुए रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल की बिक्री पर कई अहम प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब कोई भी ग्राहक एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं खरीद सकेगा।

इसके साथ ही फैक्ट्रियों, बड़े उद्योगों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और अन्य कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल और पेट्रोल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें केवल अधिकृत बल्क सप्लाई पॉइंट्स से ही ईंधन लेना होगा।

सरकार ने इस आदेश को फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू किया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

क्यों लेना पड़ा यह बड़ा फैसला?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में रिटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि कई बड़े उद्योग और व्यावसायिक संस्थान बल्क सप्लाई छोड़कर सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे थे।

इसकी सबसे बड़ी वजह रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों में भारी अंतर बताया जा रहा है। दिल्ली में जहां आम ग्राहकों के लिए डीजल की कीमत लगभग ₹95.20 प्रति लीटर है, वहीं बल्क खरीदारों को यही डीजल करीब ₹134.50 प्रति लीटर पड़ रहा है। यानी प्रति लीटर लगभग ₹39 से ₹40 का अंतर।

यही कारण था कि बड़ी कंपनियां और संस्थान रिटेल आउटलेट्स की ओर रुख कर रहे थे, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन संकट की आशंका बढ़ने लगी थी।

आम ग्राहकों पर क्या होगा असर?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। नए नियमों के तहत:

  • एक ग्राहक एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीद सकेगा।
  • डीजल केवल वाहन के फ्यूल टैंक या PESO द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जाएगा।
  • खरीदे गए डीजल की दोबारा बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का दावा है कि इस कदम से आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

किन पर लागू होगी सबसे ज्यादा सख्ती?

नई व्यवस्था के तहत निम्न श्रेणी के उपभोक्ता अब रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे:

  • बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियां
  • बस और ट्रक ऑपरेटर
  • टेलीकॉम टावर ऑपरेटर
  • निर्माण कंपनियां
  • बड़े उद्योग और फैक्ट्रियां
  • बिजली उत्पादन इकाइयां
  • कैप्टिव जनरेटर संचालित करने वाले संस्थान

इन सभी को अब बल्क सेल पॉइंट्स या अधिकृत सप्लाई चैनल से ही डीजल खरीदना होगा।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में शुरू हुए भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा। कच्चे तेल की सप्लाई और शिपिंग लागत बढ़ने से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा।

हालांकि सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए रिटेल कीमतों में सीमित बदलाव किया, लेकिन बल्क खरीदारों के लिए कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी रहीं। परिणामस्वरूप बल्क और रिटेल कीमतों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया।

उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति, संस्था या पेट्रोल पंप इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के अवैध उपयोग पर कड़ी निगरानी रखें।

IOC, BPCL और HPCL को मिली जिम्मेदारी

इस आदेश को लागू कराने की जिम्मेदारी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को दी गई है, जिनमें:

  • Indian Oil Corporation (IOC)
  • Bharat Petroleum (BPCL)
  • Hindustan Petroleum (HPCL)

शामिल हैं। इन कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी रिटेल आउटलेट से कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को थोक मात्रा में ईंधन न दिया जाए।

केंद्र सरकार का यह फैसला ईंधन वितरण व्यवस्था को संतुलित करने और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से लिया गया है। 200 लीटर की दैनिक सीमा और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं पर प्रतिबंध से रिटेल पेट्रोल पंपों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि उद्योग जगत पर इसका आर्थिक असर जरूर देखने को मिल सकता है, क्योंकि उन्हें अब महंगे बल्क डीजल पर निर्भर रहना पड़ेगा।

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